➤ पांच शहरी निकायों में वार्डबंदी की प्रक्रिया शुरू
➤ 3 मार्च को ड्राफ्ट, 30 मार्च तक आरक्षण रोस्टर अनिवार्य
➤ पांच अन्य निकायों में सीमाएं यथावत, डिलिमिटेशन नहीं
हिमाचल प्रदेश में शहरी निकाय चुनावों से पहले वार्डबंदी की प्रक्रिया तेज हो गई है। हिमाचल प्रदेश स्टेट इलेक्शन कमीशन ने सोमवार को पांच शहरी स्थानीय निकायों में डिलिमिटेशन का शेड्यूल जारी कर दिया। शहरी विकास विभाग द्वारा कुछ नए निकायों के गठन और कुछ के विस्तार के बाद यह कदम उठाया गया है। इस संबंध में राज्य निर्वाचन आयुक्त अनिल खाची ने औपचारिक आदेश जारी किए हैं।
जारी आदेशों के अनुसार बिलासपुर जिले में नगर पंचायत झंडूता और नगर पंचायत स्वारघाट, हमीरपुर जिले में नगर परिषद नादौन, सिरमौर जिले में नगर पंचायत संगड़ाह और ऊना जिले में नगर पंचायत बंगाणा में वार्डों का पुनर्गठन किया जाएगा। इनमें से कुछ निकाय नवगठित हैं, जबकि कुछ में नए क्षेत्रों को शामिल किया गया है, जिसके चलते वार्ड सीमाओं का पुनर्निर्धारण आवश्यक हो गया है।
निर्वाचन आयोग द्वारा तय कार्यक्रम के अनुसार 3 मार्च को डिलिमिटेशन का ड्राफ्ट प्रकाशित किया जाएगा। इसके बाद 10 मार्च तक आम नागरिकों से आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए जाएंगे। 13 मार्च तक संबंधित उपायुक्त को प्राप्त आपत्तियों का निपटारा करना होगा। यदि किसी पक्ष को निर्णय पर आपत्ति हो तो वह सात दिनों के भीतर डिविजनल कमिश्नर के समक्ष अपील कर सकता है।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि डिविजनल कमिश्नर को 24 मार्च तक अपीलों का निपटारा करना होगा और 25 मार्च तक अंतिम डिलिमिटेशन ड्राफ्ट प्रकाशित करना अनिवार्य होगा। इसके बाद 30 मार्च को आरक्षण रोस्टर जारी किया जाएगा। आयोग ने यह भी निर्देश दिए हैं कि यदि निर्धारित अवधि में कोई आपत्ति या अपील प्राप्त नहीं होती है तो उपायुक्त सीधे अंतिम डिलिमिटेशन आदेश जारी कर आरक्षण प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं।

वहीं आयोग ने एक अन्य आदेश में स्पष्ट किया है कि पांच नगर निकायों में इस बार डिलिमिटेशन नहीं किया जाएगा, क्योंकि सरकार ने उनमें कोई नया क्षेत्र शामिल नहीं किया है। इनमें कांगड़ा जिले की नगर परिषद ज्वालामुखी और नगर परिषद नगरोटा सूरिया, सोलन जिले की नगर निगम बद्दी और नगर पंचायत कुनिहार तथा हमीरपुर जिले की नगर पंचायत बड़सर शामिल हैं। इन निकायों को आयोग द्वारा दोबारा अधिसूचित किया जाएगा।
गौरतलब है कि मई 2025 में आयोग ने 73 नगर निकायों की डिलिमिटेशन पूरी की थी। हालांकि कुछ निकायों की वार्डबंदी को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी और कई स्थानों पर सरकार ने आसपास के क्षेत्रों को शामिल करते हुए सीमाओं में बदलाव किया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत राज्य की लगभग 3600 पंचायतों और 73 नगर निकायों में 31 मई से पहले चुनाव कराए जाने अनिवार्य हैं। ऐसे में आयोग द्वारा जारी यह शेड्यूल चुनावी प्रक्रिया की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।



